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टेस्ट क्रिकेट का अंत... या शुरुआत?

आने वाला है क्रिकेट इतिहास का एक अमर क्षण जब होने चलते स्वयं के टेस्ट के पूरे दो हज़ार रन, १८७७ मैं शुरू हुई थी जो प्रथा २०११ मैं क्या हो गयी है इसकी व्यथा.

अंग्रेजो ने नीव रखी क्रिकेट के खेल की खेल खेल मैं उन्होंने फैलाई सभ्यता ब्रिटेन की, शुरू मैं था बस यह अंग्रेजो और उनके के गुलामो का टकराव, वो क्या जानते थे एक दिन गुलाम ही करेंगे इस खेल का ऐसा बदलाव.

उन दिनों यह होता था खेल गौरव का, प्रतिष्ठा का सज्जनों का और वतन के लिए खेलने वालो का, पर जब से आई एक दिवसीय और टी-२० क्रिकेट की बहार, बदल ही गया इस खेल का व्यवहार.

अब लोगो को पसंद है मार पीट कर खेलने वाले बल्लेबाज़ गेंदबाजों की अस्मत पर गिरी है गाज, वो दिन थे जब थरथराते थे गेंदबाजों से बल्लेबाज़ हर क्षण, गेंदबाज़ थे की थे वो लंकापति रावण.

वक्त बदला, तकनीक बदली, मैदान हुए हरे भरे, वेश भूषा हुई रंगीन दूरदर्शन ने दर्शको का अनुभव बदला, तो कम कपडे पहनी नर्तकियो ने किया मामला संगीन बस कुछ नहीं बदला तो वो है क्रिकेट-प्रेमियों के प्रेम, और महानता की परिभाषा.

महानता के सर्वोच्च उदहारण, उम्मीद है लोर्ड्स पर करेंगे अंग्रेजो का हरण, भगवान् से मेरी है यही गुज़ारिश अपने अवतार के ज़रिये हमेशा करते रहे रनों की बारिश.

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