· personal
किम्कर्त्व्यविमुढ
सब कुछ था स्थिर, अविचलित, शांत सा, अचानक से इस दुविधा ने लाया एक बवंडर सा।
क्या करे क्या ना करे के दोराहे पर मैं हु खड़ा, असमंजस से जूझता, पर इरादों पर अड़ा।
इस पार है निराशा, उस पार आशा की किरण, बीच मझदार का सफ़र है, जिस पर तय होगा जीवन-मरण।
-अभिषेक ‘देसी’ देशपांडे