क्या हिंदी जीवित रहेगी?
आखिरी सासें लेती, थकी-हारी, चरमराई, हिंदी की जो है हालत, उसे बचा सके दवा न दुहाई। अंग्रेजी का अत्यधिक उपयोग, नहीं है इसका कारण, ना ही इस बात पे रोने से, टलेगा इसका मरण। हिंदी के पुनर्जन्म का, बस एक…
मलहम-ए -खिचड़ी
आपको देख दिल पे चल जाती है अभी भी छुरिया, पर आपने तो फेका था हमें जैसे सीली हुई भुजिया। खा पी कर ले रही हो तुम डकार, पर क्या कभी याद किया तुमने पुराना प्यार? धराशायी मन, टूटे दिल की…
भुलक्कड़ भारत
मैं: विचलित मन, कुंठित जीवन, दिशाहीन, घटनाओं से सहमा, घबराया हुआ। हर क्षण है मरता मेरे अन्दर यह भारत, और भारतीयता की भावना। वो: विनष्ट तन, निर्जीव जीवन, मैं ही थी वो घटना जिसने तुम्हे था जगाया। मेरी मृत्यु के…
किम्कर्त्व्यविमुढ
सब कुछ था स्थिर, अविचलित, शांत सा, अचानक से इस दुविधा ने लाया एक बवंडर सा। क्या करे क्या ना करे के दोराहे पर मैं हु खड़ा, असमंजस से जूझता, पर इरादों पर अड़ा। इस पार है निराशा, उस पार आशा की किरण,…
थम सा गया ये देश.
दिशाहीन, उलझा सा, असमंजस से जूझता हुआ, मेरा देश ऐसा तो न था. घोटालो से चरमराया विश्वास, लोकतंत्र का बना मज़ाक. अर्थव्यवस्था की चरमरायी सी हालत, जाति-धर्म के अनसुलझे विवाद, क्या मेरा देश ऐसा ही था? पर इन सब के…
App आये बहार आयी.
रविवार का था वोह दिन, जब रह ना पा रहा था भोजन तकनीक के बिन. यह दिन का हसने का, मिलने जुलने का, संगणक और इन्टरनेट से बाहर निकल, हर व्यक्ति विशेष से मिलने का. Nokia का नाम देख याद…
किस्सा कचोरी का…
रविवार का था वह एक आम सा दिन, दूरदर्शन पर चल रहा था चंद्रकांता, कैसे रहते लोग कड़क सी चाय के बिन. चाय के साथ था कुछ खस्ता, रस्क, और नमकीन, पर जब घर आई कचोरी और जलेबी, तब खिस्की…
विस्फोट, तुम फिर आ गए!
विस्फोट, तुम फिर आ गए! जीवन की कीमत तो तुमने समझी नहीं कम से कम भय की परिभाषा तो समझ लेते. मुंबई शहर में लोग हर क्षण है मरते ज़िन्दगी की भागदौड़ में दबते कुचलते इस भाग दौड़ थकान के…
काश ये दिल होता Tupperware का
हम प्यार करते थे उनसे बेशुमार, उनके इश्क मैं हुए थे बीमार हमे लगा वो भी है उतनी ही बेक़रार, कर बैठे प्यार का इज़हार. फिर क्या कहे क्या हुआ अच्छे खासे दिल का मालपुआ हुआ, दिल तो हमारा था…
हैदराबादी प्रेम कहानी… जो हो ना सकी
महिना था फरवरी का, समय था वोह अफरा तफरी का Placement का चल रहा था त्यौहार, क्योकि आजकल वही तो रह गया है प्रबंधन शिक्षा का सार. मैं बैठा था interview कक्ष मैं, सवालों से जूझता कभी हँसता, कभी लडखडाता…





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