Is it the end of the Chai-Biscuit era?
Today I received an article from a friend of mine, Where did conversation go? No where. It talks about the “about-to-die” habit of having conversations. It also debates whether forms of new media have eclipsed the intimacy of having a…
काश ये दिल होता Tupperware का
हम प्यार करते थे उनसे बेशुमार, उनके इश्क मैं हुए थे बीमार हमे लगा वो भी है उतनी ही बेक़रार, कर बैठे प्यार का इज़हार. फिर क्या कहे क्या हुआ अच्छे खासे दिल का मालपुआ हुआ, दिल तो हमारा था…
हैदराबादी प्रेम कहानी… जो हो ना सकी
महिना था फरवरी का, समय था वोह अफरा तफरी का Placement का चल रहा था त्यौहार, क्योकि आजकल वही तो रह गया है प्रबंधन शिक्षा का सार. मैं बैठा था interview कक्ष मैं, सवालों से जूझता कभी हँसता, कभी लडखडाता…
टमाटर की व्यथा: Ketchup बनू या कटरीना का Body Wash
गुमसुम गुमसुम… लाल लाल, नरम नरम, इस टमाटर मैं है बड़ा दम. जब टमाटर ketchup बन जाता, हर टेबल की यह शोभा बढाता. पकोड़े हो या पिज़्ज़ा, समोसा हो या आमलेट, टमाटर है कुदरत की एक भेंट. पर जब इंसान…





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